दुर्ग। एक ओर देश विज्ञान, तकनीक और नई शिक्षा नीति की बात कर रहा है, दूसरी ओर दुर्ग जिले के केलाबाड़ी स्थित प्राथमिक व मिडिल स्कूल परिसर में अंधविश्वास का भय खड़ा कर दिया गया है। यहां तंत्र-मंत्र जैसे निशान बनाने के बाद अब असामाजिक तत्वों ने स्कूल में तोड़फोड़ और आगजनी कर दी।
करीब एक सप्ताह पहले स्कूल के क्लासरूम के बाहर चुनरी, माला और गोबर-मिट्टी से संदिग्ध प्रतीक बनाए गए थे। बाद में कक्षाओं के भीतर भी ऐसे निशान मिले। शिक्षकों ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन घटनाएं थमी नहीं।
अब हालात यह हैं कि प्राथमिक स्कूल में टेबल-कुर्सियां जला दी गईं, जरूरी दस्तावेज राख कर दिए गए। पंखे, लाइट, बिजली बोर्ड तोड़े गए और बोर के केबल जला दिए गए। यह सिर्फ तोड़फोड़ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को सीधे निशाना बनाने जैसा है।
इससे पहले शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल बोरसी में भी प्राचार्य कक्ष के सामने कथित रूप से तंत्र-मंत्र कर कोयल की बलि देने की घटना सामने आई थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने अभिभावकों और शिक्षकों के मन में डर बैठा दिया है।
केलाबाड़ी परिसर में पहली से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। छोटे बच्चे स्कूल आने से घबरा रहे हैं। शिक्षक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
आज के दौर में जब वैज्ञानिक सोच और तार्किक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है, ऐसे कृत्य समाज की मानसिकता पर सवाल खड़े करते हैं। क्या यह अंधविश्वास है या डर फैलाने की सोची-समझी कोशिश?
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन केवल कार्रवाई तक सीमित रहता है या समाज में जागरूकता की दिशा में भी ठोस कदम उठाता है।
