रायपुर। राजधानी स्थित सरकारी डेंटल कॉलेज के पीजी और इंटर्न स्टूडेंट्स अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले 6 दिनों से आंदोलनरत हैं। आज से स्टूडेंट्स ने आंदोलन तेज करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के दौरान स्टूडेंट्स ने डॉक्टरों, मरीजों और कॉलेज स्टाफ की एंट्री पर रोक लगा दी, जिससे अस्पताल की सेवाएं प्रभावित हो गईं। स्थिति को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनकी मांग है कि स्टाइपेंड में समानता लाई जाए और गर्ल्स हॉस्टल की कमी दूर की जाए। हीं, हड़ताल के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित शिव कुमार महानंद ने बताया कि मेरे पिता का एक्सीडेंट हो गया है, जिसमें उनका बायां जबड़ा टूट गया है। लेकिन छात्रों की हड़ताल के कारण इलाज में परेशानियां हो रही है।
आंदोलन के 2 प्रमुख मुद्दे
स्टाइपेंड में समानता की मांग
पीजी और इंटर्न स्टूडेंट्स का कहना है कि मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों के पीजी छात्रों को जिस दर से स्टाइपेंड दिया जाता है, उसी दर से डेंटल पीजी और इंटर्न को भुगतान नहीं किया जा रहा है। स्टूडेंट्स के अनुसार ड्यूटी टाइम, ओपीडी, सर्जरी और मरीजों की जिम्मेदारियां समान होने के बावजूद स्टाइपेंड में भेदभाव किया जा रहा है। वे मेडिकल कॉलेज के अनुरूप स्टाइपेंड देने और इसे बैकडेट से लागू करने की मांग कर रहे हैं।
गर्ल्स हॉस्टल की कमी
स्टूडेंट्स ने कॉलेज परिसर में महिला पीजी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा न होने का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि कई छात्राओं को बाहर किराए के मकान या पीजी में रहने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे सुरक्षा और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ जाता है। स्टूडेंट्स कॉलेज कैंपस में अतिरिक्त गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।
पीजी और इंटर्न छात्रों के आंदोलन का सीधा असर मरीजों की सेवाओं पर देखने को मिला। गुरुवार को अधिकांश ओपीडी और उपचार सेवाएं प्रभावित रहीं। कई मरीज बिना इलाज और परामर्श के ही लौटने को मजबूर हुए, जबकि विभागों में कुर्सियां खाली नजर आईं।स्टूडेंट्स का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। वहीं, आंदोलन के लंबे समय तक चलने की स्थिति में आने वाले दिनों में दंत चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही है।
