पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग के हालात बन गए हैं। PAK एयरफोर्स ने एक बार फिर अफगानिस्तान में कई प्रांतों में एयरस्ट्राइक की है। दूसरी तरफ तालिबान ने भी इस्लामाद के फैजाबाद सैन्य ठिकाने समेत कई अहम मिलिट्री बेस को निशाना बनाने का दावा किया है।
संघर्ष की शुरुआत गुरुवार देर रात पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के हमले से हुई। यह हमला 22 फरवरी को अफगानिस्तान में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के जवाब में किया गया।
टोलो न्यूज के मुताबिक तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने इस हमले में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने का दावा किया। इस हमले के जवाब में PAK सरकार ने ऑपरेशन ‘गजब लिल हक’ शुरू किया और काबुल, नंगरहार, पक्तिका, पक्तिया, लगमान, खोस्त प्रांत समेत कई शहरों में एयरस्ट्राइक की।
इस एयरस्ट्राइक में पाकिस्तान ने 133 अफगान लड़ाकों को मारने का दावा किया। दोनों के बीच संघर्ष में करीब 200 लोगों के मारे जाने की खबर है।
तालिबानी लड़ाकों ने पाकिस्तानी जेट गिराया
अफगान मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबानी लड़ाकों ने एक पाकिस्तानी जेट भी मार गिराया है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। अफगान सरकार का दावा है कि 23 पाकिस्तानी सैनिकों के शव उसके पास हैं। पाकिस्तानी सेना के एक हेडक्वॉर्टर और 19 चौकियों पर भी कब्जा कर लिया गया है। PAK रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि हमारे सब्र की सीमा पार हो चुकी है, अब हमारे और आपके बीच खुला युद्ध छिड़ गया है।
तालिबान ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर सेंटर को निशाना बनाया
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के हवाले से पूर्व पाकिस्तानी सेना अधिकारी आदिल राजा ने दावा किया है कि अफगानिस्तान से आए ड्रोन ने पाकिस्तान के कुछ अहम ठिकानों पर हमला किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ये ड्रोन अफगानिस्तान से उड़ाए गए और पाकिस्तान के अंदर जाकर हमला किया।
दावे के मुताबिक जिन जगहों को निशाना बनाया गया, उनमें जमरूद का सैन्य बेस, नौशेरा का किला, स्वाबी का एक पुलिस स्टेशन और इस्लामाबाद के पास एक न्यूक्लियर एनर्जी सेंटर शामिल हैं।
पाकिस्तान और तालिबान की सैन्य ताकत में बड़ा अंतर
पाकिस्तान की सेना दुनिया की ताकतवर सेनाओं में गिनी जाती है और उसके पास परमाणु हथियार भी हैं। ग्लोबल रैंकिंग में पाकिस्तान की सेना अक्सर टॉप 15 देशों में शामिल रहती है।
वहीं दूसरी तरफ, अफगान तालिबान के पास उतने आधुनिक और भारी हथियार नहीं हैं। उनके ज्यादातर हथियार तीन जगहों से आए हैं…
पिछली अफगान सेना के छोड़े गए हथियार।
विदेशी सेनाओं के वापस जाने के बाद बचे हथियार।
और कुछ नए हथियार, जो ब्लैक मार्केट से हासिल किए गए।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पहले हुई सीमा झड़पों के वीडियो से पता चलता है कि तालिबान लड़ाके ज्यादातर हल्के हथियारों का इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, जानकारों के मुताबिक तालिबान को गुरिल्ला युद्ध (छापामार लड़ाई) का लंबा अनुभव है, जो पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में उन्हें कुछ बढ़त दे सकता है।
तुर्किये ने पाक-अफगान लड़ाई पर कई मुस्लिम देशों से बात की
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में जारी संघर्ष को लेकर तुर्किये के विदेश मंत्री हकन फिदान ने शुक्रवार को पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कतर और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के साथ बात की। रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने तुर्किये के एक डिप्लोमैटिक सोर्स के हवाले से यह जानकारी दी।
पाकिस्तान बोला- तालिबान ने 3 शहरों में ड्रोन हमले किए
पाकिस्तान ने दावा किया है कि तालिबान ने एबटाबाद, स्वाबी और नौशेरा में ड्रोन हमले किए गए। सूचना मंत्री अत्ताुल्लाह तरार ने कहा कि इन शहरों में छोटे ड्रोन देखे गए, जिन्हें सुरक्षा बलों ने मार गिराया।
तरार ने इन हमलों के लिए तालिबान सरकार को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।
