नई दिल्ली। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने की शुद्धता को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। अब 9 कैरेट यानी 375 पार्ट्स पर थाउजेंड वाले गोल्ड ज्वेलरी पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई है। इससे पहले केवल 14K से लेकर 24K तक के सोने पर ही हॉलमार्किंग जरूरी थी। नए नियमों के लागू होने के बाद अब कम कैरेट वाले गहनों पर भी ग्राहकों को शुद्धता की गारंटी मिलेगी।
BIS द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अब भारत में 9K, 14K, 18K, 20K, 22K, 23K और 24K गोल्ड पर हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई है। इसका उद्देश्य ज्वेलरी बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को ठगी से बचाना है। हॉलमार्किंग से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि ग्राहक जो सोना खरीद रहे हैं, वह तय मानकों के अनुसार शुद्ध है या नहीं।
यह फैसला खासतौर पर उन उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है जो कम कैरेट यानी किफायती गहनों की खरीदारी करते हैं। अब उन्हें भी BIS की मुहर के साथ शुद्ध सोना मिलने की गारंटी रहेगी।
घड़ियां और पेन अब हॉलमार्किंग के दायरे से बाहर
BIS के अनुसार, अब से सोने की घड़ियों और पेन को Artefacts की कैटेगरी से बाहर कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि इन पर हॉलमार्किंग आवश्यक नहीं होगी। इन उत्पादों को अब हॉलमार्किंग के दायरे में नहीं रखा जाएगा, जिससे ज्वेलर्स को कुछ हद तक राहत मिलेगी।
सोने के सिक्कों के लिए भी बदले नियम
सोने के सिक्कों की शुद्धता को लेकर भी नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब केवल 24KF या 24KS (पतली शीट) से बने गोल्ड कॉइन्स को ही 100 प्रतिशत शुद्ध माना जाएगा। ये सिक्के सिर्फ अधिकृत रिफाइनरी या सरकारी टकसाल द्वारा ही बनाए जाने चाहिए। साथ ही, इन पर कोई मुद्रा वैल्यू अंकित नहीं होनी चाहिए। यह नियम ग्राहकों को भ्रमित करने वाली नकली या अप्रमाणित सिक्कों से बचाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
BIS के इस कदम से अब ग्राहकों को ज्यादा पारदर्शिता और भरोसे के साथ सोने की खरीदारी करने में मदद मिलेगी।
