ग्राउंड रिपोर्ट // ट्रू सोल्जर
धरसींवा। रायपुर से बमुश्किल 6 किलोमीटर दूर, धरसींवा ब्लॉक में स्थित ग्राम पंचायत मटिया, लालपुर सहित कुछ गांवों में लाइमस्टोन पत्थर की लगभग 200 एकड़ में फैली खदान आज चंद मुट्ठी भर लोगों की करतूतों और सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का जीता-जागता सबूत बन चुकी है। 100 फीट से भी ज्यादा गहरी यह खदान, जिसे स्थानीय लोग ‘मौत की खाई’ कहते हैं, न सिर्फ आसपास के ग्राम पंचायत मटिया और लालपुर सहित चार गांवों की 6000 की आबादी के लिए खतरा बन गई है, बल्कि यह करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान और खनिज विभाग की संदिग्ध भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध धंधा?
यह समझना मुश्किल नहीं है कि बरसों से चल रही इस असुरक्षित और अवैध गतिविधियों को आखिर कैसे इतनी छूट मिल रही है। ग्रामीणों की शिकायतें, यहां तक कि जिला पंचायत की सामान्य सभा में उठा मुद्दा भी अनसुना कर दिया गया। यह स्थिति सीधे तौर पर सत्ता के गलियारों में बैठे कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण की ओर इशारा करती है। क्या यह संभव है कि बिना किसी राजनीतिक मिलीभगत या खुलेआम अनदेखी के, इतनी बड़ी खदान नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए धड़ल्ले से चलती रहे? स्थानीय लोगों का मानना है कि चंद लोगों की गाढ़ी कमाई के चक्कर में सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है और आम जनता की जान को जोखिम में डाला जा रहा है।
सरकार की उदासीनता: राजस्व का नुकसान, जनता को खतरा
इस खदान से सरकार को मिलने वाली रॉयल्टी शून्य है, जबकि नियमों के तहत इससे करोड़ों का राजस्व मिलना चाहिए। मटिया और लालपुर ग्राम पंचायतों में यह खदान स्थापित है, जहां विगत 25 वर्षों से कभी खनिज विभाग की रॉयल्टी नहीं आई है। यह सीधे-सीधे सरकारी राजस्व को पलीता लगाने का मामला है। खनिज विभाग की निष्क्रियता और इस पर किसी भी तरह की लगाम न कसना गंभीर चिंता का विषय है। यह सवाल खड़ा होता है कि क्या खनिज विभाग आंखें मूंदे बैठा है, या फिर इस अवैध खेल में उसकी भी कोई भूमिका है? सरकार का यह उदासीन रवैया न केवल करोड़ों के राजस्व का नुकसान कर रहा है, बल्कि यह आम जनता के जीवन और सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहा है। ब्लास्टिंग के कारण घरों में दरारें आ रही हैं, कंपन से बच्चे डरते हैं, और 100 फीट गहरी बिना सुरक्षा की खाई किसी भी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। यह महज एक खदान का मामला नहीं है, बल्कि यह उस पूरे सिस्टम की पोल खोलता है जहां मुनाफाखोरी जनता की सुरक्षा और सरकारी नियमों पर भारी पड़ रही है।
खनन रॉयल्टी और अवैध संचालन पर पंचायतों का गंभीर आरोप: ‘हमारा हक मारा जा रहा है’
ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्र में हो रहे खनन से मिलने वाली रॉयल्टी और अवैध खनन गतिविधियों को लेकर मटिया और लालपुर ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्हें न तो खनिज रॉयल्टी मिल रही है और न ही खनन कार्यों के लिए उनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिए जा रहे हैं, जबकि कई स्थानों पर तो अवैध रूप से खदानों का संचालन हो रहा है। ग्राम पंचायत मटिया की सरपंच, श्रीमती खोमिन भीम वर्मा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “विगत 30 वर्षों से ऊपर से हमारी ग्राम पंचायत की खदानों से हमें किसी भी प्रकार से खनिज की रॉयल्टी नहीं मिली है। यह तो सरासर अन्याय है! न तो हमें कोई रॉयल्टी दी गई है और न ही इन खनन गतिविधियों के लिए ग्राम पंचायत से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया गया है।”
इसी कड़ी में, ग्राम पंचायत लालपुर के सरपंच श्री केवल साहू ने अपनी पंचायत की सीमा में चल रहे अवैध खनन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। श्री साहू ने कहा, “हमारे ग्राम पंचायत की सीमा में अवैध रूप से खदानों का संचालन बेरोकटोक जारी है। हमने कई बार इसकी शिकायत की है, लेकिन हमारी बात कोई नहीं सुनता। अगर इन खदानों का संचालन सरकार के कानून के तहत हो रहा है, तो हमें पंचायत में राजस्व क्यों नहीं मिल रहा? यह राजस्व हमारा हक है और हमें मिलना ही चाहिए।”
अवैध खनन पर अधिकारियों की चुप्पी और क्रेशर मशीनों का जाल
रायपुर जिला खनिज विभाग के आधा दर्जन अधिकारियों से अवैध खदान संचालन के संबंध में फोन पर संपर्क करने का प्रयास विफल रहा, क्योंकि किसी भी अधिकारी ने कॉल का जवाब नहीं दिया। इस खदान के आसपास हजारों ट्रिप पत्थर स्टॉक में रखकर कई गिट्टी क्रेशर मशीनें भी चलाई जा रही हैं, जो इस अवैध धंधे के बड़े पैमाने पर होने का साफ संकेत देती हैं। अधिकारियों की यह चुप्पी और अवैध क्रेशर मशीनों की मौजूदगी इस बात को और पुख्ता करती है कि इस पूरे गोरखधंधे में कहीं न कहीं सरकारी तंत्र की भी संलिप्तता है या उसकी घोर लापरवाही है।
इस बारे में अपर कलेक्टर (ADM) देवेंद्र पटेल ने कहा कि, ग्राम पंचायत मटिया और लालपुर क्षेत्र की खदानों की। जांच के बाद ही पता चलेगा खदान वैध है या अवैध, संबंधित पत्थर खदान, गिट्टी खदान इसका निर्धारण केवल खनिज विभाग ही कर सकता है।मैं इसकी जांच करवाता हूं।
