रायपुर। हिंद स्वराज की रक्षा के लिए मुगलों से अंतिम सांस तक संघर्ष करने वाले महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित भव्य महानाट्य ‘जाणता राजा’ का गुरुवार रात साइंस कॉलेज मैदान में शानदार मंचन हुआ। हजारों दर्शकों की उपस्थिति में हुआ यह आयोजन इतिहास, संस्कृति और वीरता का अद्भुत संगम बन गया। जैसे ही मंच पर शिवाजी महाराज का चरित्र सामने आया, पूरा मैदान “जय शिवाजी महाराज” के जयघोष से गूंज उठा।
करीब तीन घंटे तक चले इस विशाल नाट्य प्रदर्शन में शिवाजी महाराज के जन्म से लेकर स्वराज स्थापना तक की प्रमुख घटनाओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। लोकगीत, भजन, युद्ध दृश्य, संवाद और प्रकाश व्यवस्था ने दर्शकों को मराठा इतिहास के उस दौर में पहुंचा दिया, जब स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष चरम पर था। बड़ी संख्या में बच्चे भी अपने अभिभावकों के साथ शिवाजी महाराज की वेशभूषा में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जो पूरे आयोजन का आकर्षण बने रहे।
“सावधान” के साथ हुआ भव्य शुभारंभ
महानाट्य की शुरुआत रात 8 बजकर 18 मिनट पर “सावधान…” के उद्घोष के साथ हुई। सूत्रधार ने उस समय के समृद्ध और गौरवशाली महाराष्ट्र का वर्णन करते हुए कथा को आगे बढ़ाया। “मयूरेश सरस्वती शंभु…” भजन के साथ मां भवानी और भगवान गणपति की आरती के बाद मंचन प्रारंभ हुआ। संवादों में बताया गया कि उस समय समाज इतना सुरक्षित और सम्पन्न था कि घरों में ताले लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।
भव्य मंच और जीवंत युद्ध दृश्य बने आकर्षण
करीब 80 फीट चौड़े और 40 फीट ऊंचे विशाल मंच पर किलों, राजमहलों और युद्धस्थलों के चलायमान सेट तैयार किए गए थे। मंच के नीचे वास्तविक घुड़सवार और हाथी सवार कलाकारों की मौजूदगी ने नाटक को जीवंत बना दिया। मुगल सेना के आक्रमण के दृश्य के दौरान जैसे ही घुड़सवार सैनिक दर्शकों के बीच से गुजरते दिखे, पूरा मैदान “जय महाराष्ट्र” के नारों से गूंज उठा।
इस प्रस्तुति में कुल 130 कलाकारों ने भाग लिया, जिनमें 14 तकनीकी सदस्य भी शामिल थे। कलाकारों की आयु 10 वर्ष से लेकर 76 वर्ष तक रही, जिसने इस नाटक को पीढ़ियों के सहभाग का अनूठा उदाहरण बना दिया। गुरुवार को इस महानाट्य का 1222वां मंचन बताया गया।
जीजाबाई के संवादों ने बांधा समां
नाटक में शाहजी भोंसले और जीजाबाई के प्रसंगों को विशेष रूप से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। एक दृश्य में जीजाबाई मराठा समाज पर हो रहे अत्याचारों का उल्लेख करते हुए स्वाभिमान और स्वतंत्र राज्य की स्थापना का आह्वान करती हैं। बालक शिवाजी को दिए गए उनके संस्कार, साहस और धर्मरक्षा के संदेश ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
राजमाता का संवाद- “आप सूर्यकुल में जन्मे हैं, मुगल बादशाह की जी-हुजूरी के लिए नहीं” — पूरे मैदान में तालियों और जयघोष के साथ गूंज उठा। इस दृश्य ने स्वराज की भावना को सबसे प्रभावी ढंग से सामने रखा।
नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का प्रयास
चार दिवसीय इस निःशुल्क महानाट्य का मंचन शुक्रवार, शनिवार और रविवार को भी शाम 6 बजे से साइंस कॉलेज मैदान में किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, ‘जाणता राजा’ के माध्यम से युवाओं और बच्चों को शिवाजी महाराज के आदर्शों, राष्ट्रभक्ति, न्यायप्रिय शासन और स्वाभिमान की भावना से परिचित कराया जा रहा है।
दर्शकों ने कहा कि यह प्रस्तुति केवल एक नाटक नहीं, बल्कि मराठा इतिहास की जीवंत अनुभूति है। ‘जाणता राजा’ शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व, नेतृत्व और त्याग को समझने का एक सशक्त माध्यम बनकर सामने आया, जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और गौरव के भाव से भर दिया।
