रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था को लेकर सामने आए करोड़ों रुपए के नुकसान ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। किसानों की मेहनत से उपजाया गया धान सड़ने और गायब होने की घटनाओं के बीच सरकार की ओर से दिए जा रहे तर्कों के विरोध में NSUI ने अनोखे और प्रतीकात्मक अंदाज़ में प्रदर्शन किया। NSUI कार्यकर्ता चूहे का मुखौटा पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि धान घोटाले के असली जिम्मेदारों को बचाने के लिए पूरे मामले का ठीकरा चूहों पर फोड़ा जा रहा है।
NSUI नेताओं ने कहा कि यदि सरकार के अनुसार चूहों ने करोड़ों रुपए का धान खा लिया, तो यह खुद सरकार की भंडारण व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। उन्होंने पूछा कि धान खरीदी केंद्रों और गोदामों में सुरक्षा, रखरखाव और निगरानी की क्या व्यवस्था थी। गोदामों की समय-समय पर जांच क्यों नहीं की गई और जब नुकसान की जानकारी सामने आई, तब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। NSUI का आरोप है कि सरकार अपनी विफलताओं और प्रशासनिक लापरवाही को छिपाने के लिए लगातार बहाने बदल रही है, जबकि असल में यह पूरा मामला भंडारण व्यवस्था की नाकामी और समय पर धान उठाव न होने का परिणाम है।
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इस मुद्दे पर कांग्रेस पहले से ही आक्रामक रुख अपनाए हुए है। कुछ दिन पहले पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को प्रतीकात्मक रूप से ‘चूहा पिंजरा जाली’ भेंट कर सरकार की सफाई पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि अगर सरकार यह मानती है कि धान चूहों और दीमक के कारण खराब हुआ है, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए स्थायी और ठोस इंतजाम क्यों नहीं किए गए। किसानों की मेहनत से उपजाया गया धान यूं ही सड़ जाना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि किसानों के साथ अन्याय भी है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राज्य के कई जिलों में बड़े पैमाने पर धान खराब हुआ है या फिर रहस्यमय ढंग से गायब हो गया है। गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले में करीब 20 हजार क्विंटल धान सड़ने से लगभग 6 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। इसके अलावा कवर्धा, जशपुर और महासमुंद जिलों में भी धान खराब होने, भंडारण में लापरवाही और रिकॉर्ड में गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। कांग्रेस का दावा है कि अब तक पूरे प्रदेश में लगभग 26 करोड़ रुपए का धान खराब हो चुका है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना सरकार का नैतिक और प्रशासनिक दायित्व है।
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इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस और NSUI नेताओं ने खाद्य मंत्री को ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें आजाद चौक पर ही रोक दिया। इसके बाद नेताओं ने पुलिस के माध्यम से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने की बात कही। कांग्रेस का कहना है कि यदि धान का समय पर उठाव होता, गोदामों में सही तरीके से भंडारण किया जाता और नियमित निरीक्षण होता, तो इतनी बड़ी मात्रा में धान खराब नहीं होता।
कांग्रेस और NSUI ने सरकार से मांग की है कि धान नुकसान के मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हो और किसानों को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए धान खरीदी, भंडारण और उठाव की व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाया जाए।
