रायपुर। छत्तीसगढ़ में ठंड ने एक बार फिर अपना तीखा असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के उत्तरी अंचलों में शीतलहर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। अंबिकापुर में रात का न्यूनतम तापमान 5.3 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जिससे लोगों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले तीन दिनों तक न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद प्रदेश में तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और गिर सकता है। राजधानी रायपुर में सुबह के समय घनी धुंध छाए रहने की संभावना जताई गई है, जिससे जनजीवन और यातायात प्रभावित हो सकता है।
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया।
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ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए रायगढ़ जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। दो शिफ्ट में संचालित विद्यालयों में पहली शिफ्ट की कक्षाएं सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और दूसरी शिफ्ट की कक्षाएं दोपहर 12:15 बजे से शाम 4:00 बजे तक लगेंगी। वहीं, एक शिफ्ट वाले स्कूल सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक संचालित होंगे। यह आदेश 10 जनवरी से 17 जनवरी तक प्रभावी रहेगा।
पश्चिमी विक्षोभ और जेट स्ट्रीम से बढ़ी ठंड
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से छत्तीसगढ़ में ठंड का असर तेज हुआ है। यह विक्षोभ हिमालय और उत्तर भारत से सर्द हवाओं को नीचे की ओर धकेलता है, वहीं ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज जेट स्ट्रीम इन हवाओं को तेजी से मध्य भारत की ओर पहुंचा देती है। इसी कारण उत्तर भारत की सर्दी अब छत्तीसगढ़ तक महसूस की जा रही है।
नतीजतन रात के तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है और सुबह व शाम के समय ठंड ज्यादा चुभने लगी है। कुछ क्षेत्रों में शीतलहर जैसी स्थिति बन गई है। मौसम विशेषज्ञ इसे आसान उदाहरण से समझाते हैं- जैसे फ्रिज का दरवाजा खुला हो और पंखा चल रहा हो, तो ठंडी हवा दूर-दूर तक फैल जाती है। यहां पश्चिमी विक्षोभ फ्रिज की भूमिका निभा रहा है और जेट स्ट्रीम पंखे की तरह ठंडी हवाओं को छत्तीसगढ़ तक पहुंचा रही है।
