सुकमा। दंतेवाड़ा जिले के गीदम थाना क्षेत्र में पत्रकार रौनक शिवहरे के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले और उनकी गिरफ्तारी को लेकर पत्रकारों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी के विरोध में सोमवार को सुकमा में पत्रकारों ने कलेक्टोरेट के सामने मौन धरना प्रदर्शन कर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की। मौन धरना प्रदर्शन में सुकमा प्रेस क्लब के अध्यक्ष सतीश चांडक, धर्मेन्द्र सिंह, दीपक गुप्ता, शेख सलीम, राजा राठौर, शाहनवाज खान, बीएम राव, गौरव तिवारी, अनवर हुसैन, मोहम्मद हुसैन, पूरन साहू, रोशन चौहान सहित जिले के बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।
पत्रकारों ने अपने ज्ञापन में बताया कि 6 मार्च 2026 को गीदम निवासी पत्रकार रौनक शिवहरे के घर के सामने एक ट्रैक्टर चालक ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। इस दौरान पत्रकार के पिता और दो साल की मासूम बच्ची ट्रैक्टर की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। घटना की जानकारी मिलने पर जब पत्रकार रौनक शिवहरे मौके पर पहुंचे तो ट्रैक्टर चालक से उनका विवाद हो गया।
इसके बाद पत्रकार ने गीदम थाने में घटना की लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि थाना प्रभारी ने शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की। उल्टा ट्रैक्टर चालक और उसके सहयोगियों के दबाव में आकर पुलिस ने पत्रकार रौनक शिवहरे और उनके माता-पिता के खिलाफ एसटी-एससी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
ज्ञापन में कहा गया है कि बिना समुचित जांच के पुलिस ने पत्रकार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया, जबकि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इन धाराओं में मामला बनता नहीं है। पत्रकारों का आरोप है कि एक समूह के दबाव में पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की, जिससे पत्रकारों में आक्रोश है। पत्रकारों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए और मामले की दोबारा विवेचना कर न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई : सतीश चांडक
सुकमा प्रेस क्लब के अध्यक्ष सतीश चांडक ने कहा कि गीदम में पत्रकार रौनक शिवहरे के खिलाफ दर्ज प्रकरण और उनकी गिरफ्तारी कई सवाल खड़े करती है। किसी भी विवादित मामले में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लाए, लेकिन बिना पूरी जांच के पत्रकार को गंभीर धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेजना उचित नहीं है। पत्रकार लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पूरी पारदर्शिता के साथ पालन होना चाहिए। यदि किसी प्रकार के दबाव में कार्रवाई की गई है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उन्होंने शासन-प्रशासन से आग्रह किया कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आए और किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।
