रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सदन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जोरदार बहस देखने को मिली। जहां एक ओर आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों के सवालों का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर भाजपा विधायक रिकेश सेन को मिली जान से मारने की धमकी का मामला भी सदन में गूंजा। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब की मांग की और व्यवस्था नहीं मिलने पर सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। पूरे दिन सदन का माहौल काफी गर्म रहा और कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन पर उठे सवाल
बजट सत्र के दौरान आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विधायक कविता प्राण लहरे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई पात्र लोगों को अब तक आयुष्मान कार्ड नहीं मिल पाए हैं और जिन लोगों के पास कार्ड हैं, उन्हें भी कई अस्पतालों में योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेष रूप से निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी की जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कविता प्राण लहरे ने कहा कि आयुष्मान योजना का उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई जगहों पर योजना का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि कई अस्पतालों में गंभीर बीमारियों का इलाज भी योजना के तहत नहीं किया जा रहा है, जिससे मरीजों को निजी खर्च पर इलाज कराना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने और व्यवस्था में सुधार करने की मांग की।
सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी जताई चिंता
इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल ने भी अपनी बात रखी और योजना के बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया। अजय चंद्राकर ने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य देश के गरीब लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यदि इस योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कमी रह जाती है, तो इसका सीधा असर गरीब मरीजों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां आयुष्मान कार्डधारियों को अस्पतालों में भर्ती करने से मना कर दिया जाता है या फिर इलाज में अनावश्यक देरी की जाती है। ऐसी स्थिति में सरकार को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि योजना का लाभ पात्र लोगों तक पूरी तरह पहुंच सके।
विधायक धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल ने भी इस विषय को गंभीर बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह जनहित से जुड़ा हुआ मामला है और सरकार को इस पर स्पष्ट नीति और दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आयुष्मान कार्डधारियों को इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
स्वास्थ्य मंत्री के जवाब पर बढ़ी बहस
सदन में उठे सवालों के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि सरकार आयुष्मान योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कई बार तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से कुछ समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन विभाग इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।
हालांकि मंत्री के इस जवाब से कई विधायक संतुष्ट नजर नहीं आए। अजय चंद्राकर ने कहा कि यदि निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन को लेकर कोई समस्या है, तो सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि इसके नियम क्या हैं और किन परिस्थितियों में घोषणा की जा सकती है। उन्होंने मांग की कि संबंधित नियमों और दिशा-निर्देशों को सदन की टेबल पर रखा जाए।
धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर घोषणा करने में कौन सी प्रक्रिया बाधा बन रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक अड़चन है, तो उसे दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाने चाहिए।
अन्य विधायकों ने भी रखी अपनी बात
चर्चा के दौरान विधायक सुशांत शुक्ला ने बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को कई बार पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि बड़े अस्पतालों में ही योजना का लाभ नहीं मिलेगा, तो गरीब मरीजों को राहत कैसे मिलेगी।
विधायक आशाराम नेताम ने भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग को इस मुद्दे को और गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना गरीबों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
सदन में बढ़ती बहस के बीच आसंदी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पक्ष और विपक्ष के सभी विधायक इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर चिंतित हैं और चाहते हैं कि गरीब मरीजों को इसका पूरा लाभ मिले। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को इस विषय पर जल्द निर्णय लेने की सलाह दी।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिया एक सप्ताह में समीक्षा का आश्वासन
इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि सभी सदस्यों ने एक महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान आकृष्ट कराया है और सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी एक सप्ताह के भीतर विभागीय स्तर पर विस्तृत समीक्षा की जाएगी और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे कि अधिक से अधिक अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह है कि प्रदेश के प्रत्येक पात्र व्यक्ति को इस योजना का लाभ मिले और किसी भी मरीज को इलाज के लिए आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
भाजपा विधायक को मिली धमकी का मुद्दा भी गरमाया
इसी दौरान बजट सत्र के आठवें दिन शून्यकाल में भाजपा विधायक रिकेश सेन को मिली जान से मारने की धमकी का मामला भी सदन में गूंजा। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले ही इस विषय पर सदन में गृहमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट वक्तव्य नहीं आया है। उन्होंने कहा कि किसी विधायक को जान से मारने की धमकी मिलना बेहद गंभीर विषय है और इस पर सरकार को तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने भी आसंदी से व्यवस्था देने की मांग करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को धमकी मिलती है, तो सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और सदन को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
व्यवस्था नहीं मिलने पर कांग्रेस का बहिष्कार
हालांकि आसंदी ने व्यवस्था देने से इनकार करते हुए कहा कि मामला सरकार के संज्ञान में आ चुका है और इस पर अलग से वक्तव्य की आवश्यकता नहीं है। आसंदी के इस निर्णय से असंतुष्ट विपक्षी विधायक नाराज हो गए।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब तक सरकार इस मामले में स्पष्ट जवाब नहीं देती, तब तक कांग्रेस विधायक सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। इसके बाद कांग्रेस के सभी विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया और सदन से बाहर निकल गए।
रिकेश सेन ने कहा – सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर
इस बीच भाजपा विधायक रिकेश सेन ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के इस प्रकार कार्यवाही का बहिष्कार करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है और उन्होंने अपनी सुरक्षा से संबंधित पूरी जानकारी सरकार तथा संसदीय कार्यमंत्री को दे दी है।
रिकेश सेन ने कहा कि इस मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाएगी और पूरे मामले की जांच भी की जाएगी।
