सुकमा। जिले में शासकीय योजनाओं में लापरवाही और प्रशासनिक अनुशासनहीनता के खिलाफ जिला पंचायत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ में कथित अनियमितता, लापरवाही और वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देशों की लगातार अवहेलना करने के गंभीर मामले में जिला पंचायत सुकमा ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) मुकुंद ठाकुर (भा.प्र.से.) ने कड़ा रुख अपनाते हुए ग्राम पंचायत गोंदपल्ली के सचिव माड़वी हड़मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। आरोपी सचिव के पास गोंदपल्ली के साथ-साथ गुमोड़ी और सिलगेर जैसी संवेदनशील पंचायतों का भी अतिरिक्त प्रभार था, जहाँ विकास कार्य ठप पड़े थे।

शासकीय नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप
जिला पंचायत द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, सचिव माड़वी हड़मा के खिलाफ प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और अन्य महत्वपूर्ण विभागीय कार्यों में घोर लापरवाही बरतने, पात्र हितग्राहियों के कार्यों में अड़ंगा लगाने और शासकीय धन के सही क्रियान्वयन में उदासीनता बरतने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके अलावा, उच्चाधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए शासकीय आदेशों को ठंडे बस्ते में डालना और निर्देशों की जानबूझकर नाफरमानी करना सचिव की आदत बन चुकी थी। जांच में माड़वी हड़मा का यह रवैया छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1998 की स्थापित धाराओं के सर्वथा विपरीत और शासकीय सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन पाया गया।
मुख्यालय अटैच, 7 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का अल्टीमेटम
इस गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त न करते हुए जिला पंचायत सीईओ ने छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के नियम 4(1)(क) के तहत निलंबन का डंडा चलाया है। आदेश में साफ किया गया है कि निलंबन की पूरी अवधि के दौरान आरोपी सचिव का मुख्यालय कार्यालय जिला पंचायत सुकमा निर्धारित रहेगा और बिना अनुमति के वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। नियमानुसार उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। इसके साथ ही, जिला पंचायत ने जनपद पंचायत कोन्टा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सख्त लहजे में अल्टीमेटम जारी करते हुए निर्देशित किया है कि आरोपी सचिव के विरुद्ध लगे सभी गंभीर आरोपों की गहनता से जांच कर 7 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) तैयार कर जिला मुख्यालय में प्रस्तुत करें, ताकि आगे की विभागीय जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सके।
विकास कार्य न रुकें, इसलिए बनाई गई नई वैकल्पिक व्यवस्था
सस्पेंशन की इस त्वरित कार्रवाई के बाद, प्रभावित ग्राम पंचायतों में विकास कार्य और आम जनता के कामकाज प्रभावित न हों, इसके लिए जिला पंचायत ने प्रशासनिक स्तर पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत अन्य सचिवों को इन पंचायतों की कमान सौंपी गई है:
* गोंदपल्ली पंचायत की जिम्मेदारी मुकरम के सचिव किच्चे मल्ला को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपी गई है।
* गुमोड़ी पंचायत का पूरा कामकाज अब कोण्डासांवली की महिला सचिव शमशुलहुदा संभालेंगी।
* सिलगेर पंचायत का अतिरिक्त प्रभार ताड़मेटला के सचिव टी. रवि कुमार को सौंपा गया है, ताकि क्षेत्र के रुके हुए विकास कार्यों को गति दी जा सके।
जिला पंचायत की इस ताबड़तोड़ और सख्त कार्रवाई से सुकमा जिले के प्रशासनिक अमले सहित सुस्त पड़े पंचायत सचिवों में हड़कंप मच गया है। जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दे दिया है कि ग्रामीण विकास और गरीबों के पक्के मकान की योजना में किसी भी स्तर की लापरवाही या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर सीधे बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जा सकती है।
