नई दिल्ली। UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के विरोध में देशभर के व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। इस दौरान व्यापारी UPI के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं करने और ग्राहकों से कैश या कार्ड के माध्यम से भुगतान लेने की अपील करेंगे।
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM) और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) समेत कई व्यापारी संगठनों ने प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ विरोध जताया है। व्यापारियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और अनाज जैसे कारोबार में पहले से ही मार्जिन सीमित है। ऐसे में UPI लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से कारोबारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
मध्य प्रदेश में पहले ही हुआ विरोध
व्यापारी संगठनों के मुताबिक, 23 सितंबर को मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में करीब 125 व्यापारिक संगठनों ने ‘नो UPI डे’ के तहत विरोध किया। संगठनों का दावा है कि इसके चलते राज्य में कारोबार लगभग 25 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ।
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) और पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है। MACCIA के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने कहा कि 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ के रूप में मनाया जाएगा। उनके मुताबिक, देश के विभिन्न राज्यों के व्यापारी संगठनों से इस संबंध में बातचीत की गई है।
कई व्यापारी संगठन समर्थन में
व्यापारी संगठनों के अनुसार, फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन (FRTWA), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF), ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA), ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) और अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ (AIEOTF) समेत कई संगठन ‘नो UPI डे’ के समर्थन में हैं।
क्या है MDR?
MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क है। व्यापारियों के मुताबिक, भुगतान प्रक्रिया में बैंक, पेमेंट नेटवर्क और अन्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होते हैं, जिनसे जुड़ी लागत के लिए MDR लिया जाता है।
व्यापारी संगठनों का दावा है कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के P2M (Person-to-Merchant) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई जा रही है।
हालांकि, इस प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारिक संगठनों और संबंधित पक्षों के बीच विरोध और चर्चाएं जारी हैं। 2 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘नो UPI डे’ के जरिए व्यापारी संगठन सरकार और संबंधित संस्थाओं तक अपनी मांग पहुंचाने की तैयारी में हैं।
