रायपुर। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानि एनएसओ ने पहली बार जिला स्तरीय श्रम बाजार रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के जिले सरगुजा से बेहद महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। श्रम बाजार रिपोर्ट में सरगुजा को छत्तीसगढ़ के प्रमुख जिलों में महिला श्रम बल भागीदारी के लिहाज से सबसे ऊपर रखा गया है। यहां 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट यानी एलएलपीआर 69 फीसदी है, जबकि वर्कर पापुलेशन रेशियों यानी डब्लूपीआर 68 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
इसी प्रकार देश की राजधानियों का सर्वे भी किया गया है। इसमें छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर भी देश की राजधानियों की तुलना में ऊपर दिखाई देता है। रायपुर में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की पूरी आबादी का एलएफपीआर 61.5 तथा डब्लूपीआर 59.4 फीसदी है। रिपोर्ट में राज्य की राजधानियों के बीच एलएफपीआर और डब्लुपीआर दोनों के लिहाज से रायपुर तीसरे स्थान पर है।
एलएफपीआर और डब्लूपीआर क्या है
एलएफपीआर यानि लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट आबादी में उन लोगों का प्रतिशत है जो या तो काम कर रहे हैं, या काम तलाश रहे हैं अथवा काम करने के लिए उपलब्ध हैं। डब्लुपीआर यानी वर्कर पापुलेशन रेशियो आबादी में उन लोगों का प्रतिशत है जो वास्तव में किसी आर्थिक गतिविधि में लगे हुए हैं। सरल भाषा में कहें तो एलएफपीआर बताता है कि कितने लोग श्रम बाजार में हैं, जबकि डब्लुपीआर बताता है कि वास्तव में कितने लोग काम कर रहे हैं। दोनों के बीच का अंतर बेरोजगारी या काम की तलाश या उपलब्धता की स्थिति को समझने में मदद करता है।
रायपुर भी देश की शीर्ष राजधानी जिलों में
रायपुर की तस्वीर अलग है। यहां एनएसओ ने महिलाओं के बजाय 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की पूरी आबादी के श्रम बाजार संकेतक दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रायपुर का एलएफपीआर 61.5 फीसदी और इबलूपीआर 59.4 फीसदी है। राज्य की राजधानियों में इससे ऊपर शिमला का एलएफपीआर 70 फीसदी और इब्लूपीआर 65.1 फीसदी तथा तिरुवनंतपुरम का एलएफपीआर 64.4 फीसदी और इब्लूपीआर 63.2 फीसदी है। इस तरह रायपुर इस तुलना में तीसरे स्थान पर आता है। यह आंकड़ा खास इसलिए है क्योंकि पहली बार जिला स्तर पर उपलब्ध कराए गए श्रम बाजार के आंकड़ों में राजधानी रायपुर की स्थिति को दूसरे राज्यों की राजधानियों के साथ सीधे देखा जा सकता है।
देश के दूसरे जिलों की तुलना में सरगुजा
एनएसओ की रिपोर्ट में राज्यों के सभी जिलों की पूरी रैंकिंग नहीं दी गई है। महिला एलएफपीआर के लिए राज्यों के महिला आबादी के लिहाज से चुने गए प्रमुख जिलों में- सबसे अधिक दर वाले जिले को दिखाया गया है। इस तुलना में हिमाचल प्रदेश का हमीरपुर 80.9 फीसदी महिला एलएफपीआर के साथ ऊपर है। ओडिशा का मयूरभंज 71.8 फीसदी और जम्मू-कश्मीर का बडगाम 71.4 फीसदी है। इसके बाद छत्तीसगढ़ का सरगुजा 69 फीसदी पर है।

सरगुजा में 10 में करीब सात महिलाएं श्रम बल में
एनएसओ की 18 सितंबर 2026 को जारी रिपोर्ट में अलग-अलग जिलों के श्रम बाजार की पहली जिला-स्तरीय तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के करीब 57.8 फीसदी जिलों में महिलाओं का एलएफपीआर 40 फीसदी या उससे अधिक है। छत्तीसगढ़ के मामले में रिपोर्ट ने राज्य के महिला आबादी के हिसाब से सबसे बड़े जिलों में से सबसे अधिक महिला एलएफपी आर और डब्लूपी आर वाले जिले के रूप में सरगुजा को दर्ज किया है। सरगुजा में महिला एलएफपीआर 69 फीसदी और महिला इबलूपीआर 68 फीसदी है। इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि सरगुजा की 69 फीसदी महिलाएं नौकरी कर रही हैं।
सरगुजा में 68% महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय
एलएफपीआर में वे महिलाएं भी शामिल होती हैं जो काम कर रही हैं या काम तलाश रही हैं अथवा काम के लिए उपलब्ध हैं। वास्तविक रूप से आर्थिक गतिविधि में लगी महिलाओं का अनुपात डब्लूपीआर से पता चलता है, जो सरगुजा में 68 फीसदी है। यानी रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि सरगुजा में 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की 100 महिलाओं में करीब 69 महिलाएं श्रम बाजार से जुड़ी हुई थीं और करीब 68 महिलाएं किसी आर्थिक गतिविधि में लगी थीं।
