नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। भारत अब पूरी तरह से डिजिटल और बैरियर-फ्री (बाधा-रहित) टोलिंग प्रणाली की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 को संबोधित करते हुए ऐलान किया है कि देश में फरवरी-मार्च 2027 तक एआई (AI) आधारित नई टोलिंग व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसके चालू होने के बाद गाड़ियों को टोल चुकाने के लिए प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कैसे काम करेगी नई AI टोल प्रणाली?
यह नई सीमलेस (निर्बाध) व्यवस्था स्वचालित वाहन नंबर प्लेट पहचान (ANPR) और मौजूदा FASTag तकनीक को आपस में इंटीग्रेट करके काम करेगी। इसके लागू होने से टोल प्लाजा पर वाहनों का वेटिंग टाइम पूरी तरह खत्म हो जाएगा। गडकरी ने कहा, भारत टोल प्लाजा पर रुकने की पुरानी व्यवस्था को खत्म कर सीधे आगे बढ़ने की दिशा में काम कर रहा है।
भविष्य का राजमार्ग इंटेलिजेंट, बाधा रहित और पूरी तरह से कैशलेस होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था से समय की बचत के साथ-साथ सालाना टोल राजस्व में करीब 10,000 करोड़ रुपये का इजाफा होगा।
वन टैग’ (OneTag) से बैंक बदलना हुआ आसान
केंद्रीय मंत्री ने ‘OneTag’ सुविधा भी लॉन्च की। अब यदि कोई FASTag उपयोगकर्ता अपना बैंक अकाउंट बदलना (पोर्ट करना) चाहता है, तो उसे गाड़ी के शीशे से पुराना टैग हटाकर नया टैग खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई व्यवस्था के तहत ग्राहक बिना नया फास्टैग खरीदे आसानी से अपना बैंक बदल सकेंगे।
FASTag ने 90% तक कम किया वेटिंग टाइम
फास्टैग की सफलता के आंकड़े साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2014 में इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था और 2021 में इसे पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया। आज देश के 98% से अधिक वाहनों में फास्टैग का उपयोग हो रहा है और अब तक 13 करोड़ से अधिक टैग जारी किए जा चुके हैं। इस तकनीक ने टोल प्लाजा पर लगने वाले 12 से 30 मिनट के प्रतीक्षा समय को 80 से 90 प्रतिशत तक घटा दिया है।
