रायपुर। शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में “प्रशासनिक दक्षता, सुशासन एवं संस्थागत उत्कृष्टता” विषय पर चल रहे सात दिवसीय स्टाफ डेवलपमेंट प्रोग्राम का समापन हो गया। 19 से 25 अगस्त तक चले कार्यक्रम में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों समेत 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के छठे दिन “प्रशासनिक उत्कृष्टता एवं सुशासन” विषय पर विशेष सत्र हुआ। इसमें उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय अपर संचालक डॉ. अमिताभ बनर्जी रिसोर्स पर्सन रहे।
डॉ. बनर्जी ने कहा कि किसी भी संस्थान में उत्कृष्ट प्रशासन केवल नियमों और प्रक्रियाओं के पालन से संभव नहीं है। इसके लिए जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेने, बेहतर योजना, आपसी समन्वय, प्रभावी संवाद और उपलब्ध संसाधनों के उचित उपयोग की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि संस्थागत समन्वय और काम के प्रति प्रतिबद्धता ही सुशासन की मजबूत नींव तैयार करती है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
उन्होंने सुशासन के प्रमुख आधारों पर चर्चा करते हुए पारदर्शिता, जवाबदेही, उत्तरदायित्व, सहभागिता, समानता, दक्षता और विधि के शासन को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि इन सिद्धांतों को कार्यप्रणाली में शामिल करने से संस्थान में विश्वास और अनुशासन की भावना मजबूत होती है। साथ ही प्रशासनिक निर्णय अधिक निष्पक्ष, समावेशी और परिणामोन्मुख बनते हैं।
हर कर्मचारी की भूमिका महत्वपूर्ण
डॉ. बनर्जी ने कहा कि संस्थान के सुचारु संचालन में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। हर कर्मचारी को अपने दायित्व को समझते हुए टीम भावना से काम करना चाहिए। उन्होंने व्यावसायिकता, सहयोग और लगातार सीखते रहने को बेहतर कार्य-संस्कृति के लिए जरूरी बताया।
उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में डिजिटलीकरण और तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। अभिलेखों के समय पर संधारण, प्रभावी संचार, शासकीय नीतियों के क्रियान्वयन और संस्थागत नियमों के पालन को प्रशासनिक दक्षता का अहम हिस्सा बताया। बदलती जरूरतों के अनुसार कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण और क्षमता विकास को भी आवश्यक बताया।
प्राचार्य बोलीं- जिम्मेदारी सुशासन की आधारशिला
महाविद्यालय की प्राचार्य एवं कार्यक्रम संरक्षक डॉ. अंजलि भटनागर ने कहा कि “जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता सुशासन की आधारशिला हैं।” उन्होंने कहा कि कर्मचारियों द्वारा अपने दायित्वों का ईमानदारी, जवाबदेही और समर्पण के साथ निर्वहन करने से अनुशासन, टीमवर्क और समयबद्ध कार्यप्रणाली मजबूत होती है। इससे संस्थान में सकारात्मक कार्य-संस्कृति विकसित होती है और संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलता है।
साइबर फ्रॉड से लेकर तनाव प्रबंधन तक हुए सत्र
सात दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ अवकाश नियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम एवं निवारण, साइबर फ्रॉड से बचाव, भावनात्मक कल्याण एवं तनाव प्रबंधन तथा प्रशासनिक उत्कृष्टता एवं सुशासन जैसे विषयों पर जानकारी दी। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत विकास से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।
आयोजन में इनकी रही भूमिका
कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मंजू वर्मा, आयोजन सचिव श्री लखपति पटेल, सह-समन्वयक डॉ. अनिल रामटेके एवं समन्वयक डॉ. नियति गुरुद्वान का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के माध्यम से कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने के साथ संस्थागत उत्कृष्टता की दिशा में काम करने की नई दृष्टि मिली।
