दुर्ग। भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को चुनावी विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडेय की चुनाव याचिका को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया गया था। अब इस मामले में हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई 31 अगस्त से शुरू होगी।
मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। इस चुनाव में देवेंद्र यादव ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय को पराजित किया था। चुनाव परिणाम के बाद पांडेय ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी थी। याचिका में चुनावी हलफनामे में जरूरी जानकारियां पूरी तरह नहीं दिए जाने सहित कई आरोप लगाए गए हैं।
हाईकोर्ट में कार्यवाही रोकने की मांग हुई थी खारिज
चुनाव याचिका पर सुनवाई के दौरान देवेंद्र यादव की ओर से हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर कुछ मुद्दों को प्रारंभिक स्तर पर ही तय करने और चुनाव याचिका की आगे की कार्यवाही रोकने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को यह मांग खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में माना था कि मामले से जुड़े सवालों का फैसला केवल दस्तावेजों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए दोनों पक्षों के साक्ष्य, गवाहों के बयान और संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से किया इनकार
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ देवेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और विशेष अनुमति याचिका दायर की। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और एसएलपी खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देवेंद्र यादव ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि अदालत में दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात रख रहे हैं और वे भी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखेंगे।
हलफनामे की जानकारियों को लेकर सवाल
प्रेम प्रकाश पांडेय की चुनाव याचिका में देवेंद्र यादव द्वारा नामांकन के दौरान दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे की जानकारियों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में आपराधिक प्रकरणों, संपत्ति और अन्य जरूरी जानकारियों का पूरा विवरण नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि उम्मीदवार से जुड़ी ऐसी जानकारियां मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण होती हैं और इनका चुनाव प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है। हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि आरोपों की सत्यता का निर्धारण साक्ष्य और गवाही के आधार पर ही किया जाएगा।
31 अगस्त से नियमित सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब भिलाई नगर विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। 31 अगस्त से शुरू होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने दस्तावेज और साक्ष्य पेश करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
इस मामले का अंतिम फैसला हाईकोर्ट में होने वाली विस्तृत सुनवाई और सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा। चुनाव याचिका से जुड़े एक अन्य मामले में भी देवेंद्र यादव की विशेष अनुमति याचिका पहले सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो चुकी है।
