रायपुर। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत का जज बनने के लिए 3 साल वकालत की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने पिछले साल दिए आदेश में संशोधन करते हुए शुक्रवार (21 अगस्त, 2026) को कहा कि अब एक साल की प्रैक्टिस वाले लोग भी जज भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकेंगे, लेकिन उन्हें जज के रूप में नियुक्ति दो साल ट्रेनिंग और क्लर्कशिप के बाद ही मिलेगी। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च अदालत की बेंच ने बताया कि, इस नई व्यवस्था का मकसद उम्मीदवारों को कोर्ट के कामकाज की जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव देना है। शीर्ष अदालत ने अपने ही पिछले साल के फैसले में बदलाव करते हुए एंट्री लेवल न्यायिक सेवा के लिए 3 साल वकालत की शर्त संबंधी क्राइटेरिया में तब्दीलियां की हैं।
अब सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य तीन साल की लीगल प्रैक्टिस की शर्त को घटाकर बार में एक साल का अनुभव कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुने गए उम्मीदवारों को स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी में एक साल की ट्रेनिंग लेनी होगी, जिसके बाद ड्ट्रिरक्ट एंड सेशन जज या हायर ज्यूडिशियल सर्विस के किसी सदस्य के अंडर छह महीने की लॉ क्लर्कशिप करनी होगी। कोर्ट ने सभी लॉ ग्रेजुएट को तीन साल की प्रैक्टिस की जरूरत पूरी किए बिना तुरंत लोअर ज्यूडिशियल सर्विस के एग्जाम में बैठने की इजाजत दी और 31 मार्च तक के समय के लिए छूट दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 1 अप्रैल 2027 को या उसके बाद जारी होने वाले भर्ती नोटिफिकेशन में कैंडिडेट के पास बार में कम से कम एक साल की वेरिफाइड एक्टिव प्रैक्टिस होनी जरूरी होगी।
