रायपुर। बाल देखरेख संस्थाओं में रह रहे अनाथ और निराश्रित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर अब इन बच्चों को कौशल विकास, डिजिटल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की राज्यव्यापी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके लिए कॉरपोरेट क्षेत्र और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा।
गुरुवार को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अपने निवास कार्यालय में एक्सिस बैंक के भारत प्रमुख विजय और कैटलिस्ट फॉर सोशल एसोसिएशन की भारत प्रमुख स्मिता रांधे के साथ बैठक कर बच्चों के पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में एक्सिस बैंक के सीएसआर फंड के माध्यम से बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने, व्यावसायिक प्रशिक्षण देने और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया।
मंत्री राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाला कोई भी बच्चा केवल संरक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि शिक्षा, कौशल और रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी सके। उन्होंने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकारी प्रयासों के साथ सामाजिक संस्थाओं और उद्योग जगत की भागीदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि सामुदायिक सहयोग से बाल संरक्षण एवं बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों के सामाजिक पुनर्वास का अभियान करीब एक वर्ष पहले शुरू किया गया था। वर्तमान में यह पहल प्रदेश के पांच जिलों में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों में लागू करने की तैयारी की जा रही है।
बैठक में बच्चों को डिजिटल स्किल, व्यावसायिक प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही यह भी तय किया गया कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से बाल देखरेख संस्थाओं में बुनियादी सुविधाओं के विकास और बच्चों के समग्र पुनर्वास के लिए दीर्घकालिक सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
