रायपुर। नगर निगम मुख्यालय के सामने स्थित उद्यान की चौपाटी में संचालित 10 दुकानों को नगर निगम द्वारा सील किए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कार्रवाई को तानाशाही बताते हुए कहा कि इससे सैकड़ों लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है और व्यापारियों को बिना पूर्व सूचना के भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
आकाश तिवारी ने व्यापारियों के साथ मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि दुकानों के अंदर सब्जियां, पनीर, मसाले, गैस सिलेंडर, इंडक्शन सहित हजारों रुपये का कच्चा माल बंद है, जो खराब हो रहा है। व्यापारियों के अनुसार वे हर माह 12 से 25 हजार रुपये तक किराया देते थे और कुल मिलाकर करीब 1.75 लाख रुपये मासिक किराया जमा किया जाता था।
व्यापारियों ने बताया कि उनका प्रत्यक्ष अनुबंध नगर निगम से नहीं, बल्कि विधि बुक एंड स्टेशनरी से था। वहीं विधि बुक एंड स्टेशनरी का अनुबंध गणपति इंफ्रास्ट्रक्चर से था, जबकि गणपति इंफ्रास्ट्रक्चर का नगर निगम से 2022 में अनुबंध हुआ था। तिवारी ने दावा किया कि संबंधित अनुबंध की मूल फाइल कई महीनों से निगम से गायब बताई जा रही है, जो अपने आप में गंभीर मामला है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि निगम को कार्रवाई करनी ही थी तो कम से कम 48 घंटे का समय दिया जाना चाहिए था, ताकि व्यापारी अपना सामान सुरक्षित निकाल सकें। बिना नोटिस दुकानें सील करना अमानवीय और अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भी यूनिवर्सिटी क्षेत्र की चौपाटी हटाने से करीब 400 परिवारों का रोजगार प्रभावित हुआ था और अब वही स्थिति नगर निगम मुख्यालय के सामने दोहराई जा रही है।
आकाश तिवारी ने निगम प्रशासन से सवाल किया कि दुकानों में रखे सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी, खराब हुए कच्चे माल की भरपाई कौन करेगा, गार्डन की व्यवस्था कैसे संचालित होगी और व्यापारियों को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा। उन्होंने कहा कि अनुबंध समाप्त होने में अभी लगभग एक माह शेष था। यदि समय रहते सूचना दी जाती तो व्यापारी वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते थे।
