नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए भारत ने नागरिकों को फिलहाल ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है। वहीं, जो भारतीय नागरिक पहले से ईरान में मौजूद हैं, उन्हें सुरक्षा हालात को देखते हुए उपलब्ध उड़ानों के जरिए देश से बाहर निकलने पर विचार करने को कहा गया है।
ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने जारी निर्देशों में भारतीय नागरिकों से अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की है। दूतावास ने कहा है कि जब तक ईरान में सुरक्षा स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक भारतीय नागरिक किसी भी परिस्थिति में ईरान की यात्रा न करें। इसके साथ ही ईरान में रह रहे भारतीयों को सलाह दी गई है कि वे दूतावास के साथ अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से पूरा करें, ताकि आपात स्थिति में उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
सैन्य गतिविधियों वाले इलाकों से दूरी बनाने की सलाह
भारतीय दूतावास ने नागरिकों को सैन्य गतिविधियों वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। दूतावास ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
दूतावास ने भारतीय नागरिकों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जारी होने वाले अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह भी दी है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता
भारत की यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई है जब मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है। हालिया सैन्य घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है। अमेरिकी ठिकानों और ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों को लेकर जारी हमलों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है।
संघर्ष के कारण जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और कतर समेत कई देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी लगातार निगरानी में हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडरा रहा खतरा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। लंबे समय से जारी अस्थिरता ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है और दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है।
