Operation Sindoor 2026: नई दिल्ली। भारत सरकार ने पिछले साल मई 2025 के महीने में सीमा पार पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में संचालित किए गए सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार आधिकारिक तौर पर भारतीय सशस्त्र बलों के उन छह वीर सैनिकों के नामों को सार्वजनिक कर दिया है, जिन्होंने इस बेहद कठिन ऑपरेशन के दौरान मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
इन सभी छह जांबाजों के नाम नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘रोल ऑफ ऑनर’ खंड में शामिल करने के साथ ही स्मारक की दीवार पर हमेशा के लिए उकेर दिए गए हैं। यह पहला मौका है जब देश की रक्षा के लिए सीमा पार जाकर की गई इस सैन्य कार्रवाई में हुए नुकसान को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया है।
नेशनल वॉर मेमोरियल की ‘वॉल 3D’ पर साल 2025 के खंड में अंकित हुए नाम
Operation Sindoor 2026: प्राप्त जानकारियों के अनुसार, देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले इन वीर सपूतों के नाम स्मारक के ‘वॉल 3D’ पर साल 2025 के विशेष खंड में स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए हैं। सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन छह नायकों में मुख्यालय 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड के सूबेदार मेजर पवन कुमार, 4 जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री के राइफलमैन सुनील कुमार (मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित), 5 फील्ड रेजिमेंट के लांस नायक दिनेश कुमार, 851 लाइट रेजिमेंट के एविएशन टेक्निशियन मूड मुरलीनायक, 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी के हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायुसेना की 39 विंग के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना पदक विजेता) शामिल हैं।
पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के प्रतिशोध में शुरू हुआ था ऑपरेशन
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि बेहद संवेदनशील और आक्रोश से भरी थी। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने एक कायराना हमला किया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी, जिनमें अधिकांश देश-विदेश से आए पर्यटक थे। इस बर्बरता का कड़ा और सबक सिखाने वाला जवाब देने के लिए भारतीय थलसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से रणनीति तैयार की।
Operation Sindoor 2026: 7 मई 2025 की तड़के सुबह भारतीय जांबाजों ने सीमा पार जाकर पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे खूंखार संगठनों के नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक और विनाशकारी हमले किए। इन हमलों में आतंकियों के लॉन्च पैड्स और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह मटियामेट कर दिया गया। इसके बाद, दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों के बीच हुई हॉटलाइन वार्ता के बाद 10 मई को इस सैन्य कार्रवाई को रोकने पर सहमति बनी थी।
थलसेना और वायुसेना की संयुक्त वीरता का ऐतिहासिक प्रतीक बना अभियान
स्मारक पर अंकित हुए इन छह नामों से यह साफ जाहिर होता है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सशस्त्र बलों के बहु-सेवा समन्वय और संयुक्त युद्ध कौशल का एक बेहतरीन उदाहरण था, जिसमें थलसेना के इन्फैंट्री व आर्टिलरी जवानों के साथ वायुसेना के विंग कर्मियों ने कंधे से कंधा मिलाकर दुश्मन के दांत खट्टे किए थे।
Operation Sindoor 2026: वीरता पुरस्कारों की सूची में शामिल राइफलमैन सुनील कुमार को अदम्य साहस के लिए ‘वीर चक्र’ और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को ‘वायु सेना पदक’ मिलना इस बात का गवाह है कि हमारे सैनिकों ने किस तरह विपरीत परिस्थितियों में जांबाजी की मिसाल पेश की थी। साल 2019 में निर्मित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक अब स्वतंत्रता के बाद के गौरवशाली सैन्य इतिहास में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के इन अमर शहीदों की गाथा को भी हमेशा के लिए अपने सीने में संजोए रखेगा।
