रायपुर। बहुमंजिला इमारतों में बढ़ती लिफ्ट दुर्घटनाओं की आशंकाओं के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने लिफ्ट सुरक्षा और संचालन को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को निर्देश दिया है कि बहुमंजिला आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग वाली इमारतों में लिफ्ट सुरक्षा संबंधी जारी परामर्शों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
सरकार का कहना है कि, इन प्रावधानों का उद्देश्य लिफ्ट संचालन में सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम करना है। नवा रायपुर मंत्रालय से जारी आदेश में कहा गया है कि लिफ्ट सुरक्षा संबंधी यह परामर्श राष्ट्रीय भवन संहिता, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के प्रासंगिक मानकों तथा अन्य लागू नियमों और अधिनियमों के अनुरूप तैयार किए गए हैं। सभी स्थानीय निकायों को अपने अधिकार क्षेत्र में इनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
आग लगने पर लिफ्ट का उपयोग नहीं करने की हिदायत
दिशा-निर्देशों में आग लगने की स्थिति में लिफ्ट के उपयोग से बचने और केवल सीढ़ियों का इस्तेमाल करने की स्पष्ट सलाह दी गई है। इसके लिए भवनों में आवश्यक चेतावनी संकेतक लगाने और निवासियों को समय-समय पर जागरूक करने की भी व्यवस्था करने को कहा गया है। जानकारों के अनुसार आग के दौरान विद्युत आपूर्ति बाधित होने या धुआं लिफ्ट शाफ्ट में भरने से गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसी वजह से दुनिया भर के भवन सुरक्षा मानकों में आपात स्थिति में सीढ़ियों को प्राथमिक विकल्प माना जाता है।
Read Also- NEET-UG 2026 Re-Exam: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, परीक्षा से पहले 5 दिन टेलीग्राम पर रोक, कंपनी को झटका
लिफ्ट लगाने से पहले सुरक्षा मंजूरी जरूरी
नई व्यवस्था के तहत किसी भी बहुमंजिला भवन में लिफ्ट स्थापित करने से पहले आवश्यक अनुमोदन, पंजीयन और सुरक्षा परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। लिफ्ट के संचालन से पहले उसकी तकनीकी जांच और थर्ड पार्टी निरीक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लिफ्ट शुरू होने से पहले सभी सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन व्यवस्थाएं पूरी तरह कार्यशील हो। जानकारों का कहना है कि देश में लिफ्ट दुर्घटनाओं के कई मामलों में स्थापना के बाद नियमित परीक्षण और रखरखाव की कमी सामने आई है। ऐसे में सरकार का यह कदम केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जोखिम प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
फायर रेटेड शाफ्ट एवं बैकअप बिजली होगी अनिवार्यपरामर्श में कहा गया है कि लिफ्ट शाफ्ट को अग्निरोधी मानकों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए ताकि आग लगने की स्थिति में यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके। इसके अलावा लिफ्ट के लिए अलग विद्युत आपूर्ति व्यवस्था और आपातकालीन बिजली बैकअप भी अनिवार्य होगा, जिससे बिजली गुल होने पर लोग लंबे समय तक लिफ्ट में फंसे न रहें। आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप लिफ्ट में ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस लगाने पर भी जोर दिया गया है, जिससे बिजली बाधित होने की स्थिति में लिफ्ट निकटतम मंजिल तक पहुंचकर अपने आप दरवाजा खोल सके।
साप्ताहिक से वार्षिक निरीक्षण तक की व्यवस्था
सरकार ने केवल उपकरण लगाने तक खुद को सीमित नहीं रखा है बल्कि नियमित निगरानी पर भी जोर दिया है। इसके तहत साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक निरीक्षण की व्यवस्था तय की गई है। रखरखाव से जुड़े सभी रिकॉर्ड और निरीक्षण रिपोटों को कम से कम पांच वर्ष तक सुरक्षित रखना होगा ताकि किसी दुर्घटना या शिकायत की स्थिति में जांच की जा सके। यह व्यवस्था भवन मालिकों और रखरखाव एजेंसियों की जवाबदेही तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
Read Also- चोरी के शक में हैवानियत की हदें पार: युवकों को निर्वस्त्र कर पीटा, धूप में खेत में बांधकर छोड़ा
दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाओं पर जोर
लिफ्टों को अधिक समावेशी बनाने के लिए बेल संकेतक, ऑडियो फ्लोर अनाउंसमेंट और दृश्य मंजिल संकेतक जैसी सुविधाओं को भी अनिवार्य प्रावधानों में शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार की बहुमंजिला इमारतों में दिव्यांगजनों की सुगम पहुंच सुनिश्चित करना आधुनिक शहरी अवसंरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नियम तोड़ा तो लिफ्ट बंद या सील हो सकती है
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने की स्थिति में संबंधित लिफ्ट का संचालन रोका जा सकता है या उसे सीलबंद किया जा सकता है। इसके अलावा किसी दुर्घटना, चोट या जनहानि की स्थिति में भवन स्वामी, प्रबंधन समिति अथवा संबंधित रखरखाव एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। यही प्रावधान इस पूरी पहल को महज सलाह के बजाय जवाबदेही आधारित सुरक्षा ढांचे में बदलते हैं।
बढ़ती ऊंची इमारतों के बीच बड़ा कदम
रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा और अन्य शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही लिफ्टों पर निर्भरता भी बढ़ी है। ऐसे में सरकार के नए निर्देशों को शहरी नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि स्थानीय निकाय इन मानकों का सख्ती से पालन कराते हैं और भवन प्रबंधन समितियां नियमित रखरखाव सुनिश्चित करती हैं, तो लिफ्ट से जुड़े अधिकांश हादसों को रोका जा सकता है।
