सुकमा। नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल में कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 2013 बैच के वीर पुलिस अधिकारी एएसपी आकाश राव गिरिपुंजे की प्रथम पुण्यतिथि मंगलवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। जिले के कोंटा क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में शहीद हुए इस जांबाज अधिकारी को याद करते हुए पूरा सुकमा भावुक नजर आया। जिला मुख्यालय के बस स्टैंड परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में नागरिकों ने भी भाग लेकर उन्हें नमन किया।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण, कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जवानों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने शहीद अधिकारी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण भावुक बना रहा और उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर वीर अधिकारी को श्रद्धांजलि दी।
जवानों के नेता थे आकाश राव गिरिपुंजे
शहीद एएसपी आकाश राव गिरिपुंजे को याद करते हुए उनके साथ काम कर चुके जवानों और अधिकारियों की आंखें भर आईं। साथी जवान बताते हैं कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे केवल आदेश देने वाले अधिकारी नहीं थे, बल्कि हर चुनौतीपूर्ण अभियान में स्वयं सबसे आगे खड़े होकर अपनी टीम का नेतृत्व करते थे। वे जवानों के दुख-दर्द को समझते थे और हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाने का काम करते थे।
जवानों का कहना है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में जहां हर कदम खतरे से भरा होता है, वहां भी आकाश राव गिरिपुंजे कभी पीछे नहीं हटे। वे हमेशा कहते थे कि पुलिस की वर्दी सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और देश सेवा का संकल्प है। यही सोच उन्हें अपने अधीनस्थ जवानों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती थी।
नक्सलियों ने रची थी खतरनाक साजिश
9 जून 2025 को कोंटा थाना क्षेत्र के डोंडरा गांव के समीप स्थित एक गिट्टी खदान में नक्सलियों ने पोकलेन मशीन को आग के हवाले कर अपनी मौजूदगी का संदेश देने की कोशिश की थी। घटना की सूचना मिलते ही एएसपी आकाश राव गिरिपुंजे ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया और अपनी टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।
लेकिन नक्सलियों ने पहले से ही एक सुनियोजित और घातक साजिश रच रखी थी। उन्होंने घटनास्थल के आसपास कई स्थानों पर आईईडी विस्फोटक लगा रखे थे, ताकि सुरक्षा बलों को निशाना बनाया जा सके। जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा, धरती कांप गई और चारों ओर धुएं का गुबार फैल गया।
इस भीषण विस्फोट में एएसपी आकाश राव गिरिपुंजे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें बचाने के हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन उन्होंने देश सेवा करते हुए वीरगति प्राप्त कर ली। उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई थी।
कर्तव्य के प्रति समर्पण की मिसाल
आकाश राव गिरिपुंजे का पूरा पुलिस जीवन साहस, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण रहा। उन्होंने हमेशा अपने दायित्वों को सर्वोपरि रखा और कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से कभी समझौता नहीं किया। नक्सल मोर्चे पर उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता को आज भी उनके साथी प्रेरणा के रूप में याद करते हैं।
उनके साथियों के अनुसार, चाहे मौसम की कठिनाइयां हों या नक्सलियों का खतरा, उनके चेहरे पर हमेशा आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प दिखाई देता था। वे हर अभियान में जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे और यही कारण है कि आज भी जवान उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।
नम हुईं आंखें, गूंजे अमर शहीद के नारे
प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान कई जवान और अधिकारी अपने आंसू नहीं रोक सके। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने “शहीद आकाश राव गिरिपुंजे अमर रहें” और “भारत माता की जय” के नारों के साथ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
वक्ताओं ने कहा कि आकाश राव गिरिपुंजे जैसे वीर अधिकारी देश और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर यह साबित कर दिया कि राष्ट्र सेवा और जनता की सुरक्षा के लिए समर्पित पुलिस बल हर चुनौती का सामना करने के लिए सदैव तैयार है।
उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर पूरा सुकमा अपने इस वीर सपूत को नमन कर रहा है। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। शहीद एएसपी आकाश राव गिरिपुंजे का नाम छत्तीसगढ़ पुलिस और देश के इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।
